भाेपाल . इंसानाें से दाेस्ती की सजा बांधवगढ़ नेशनल पार्क के एक बाघ और बाघिन काे मिल गई है। ये दाेनाें अब 21 दिन दस बाय दस के कमरे में सजा काटेंगे। यदि ये दाेनाें इंसानाें से दाेस्ती नहीं रखते ताे इन्हें सतपुड़ा नेशनल पार्क के खुले जंगल में छाेड़ दिया जाता। दरअसल, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रंछा वाली बाघिन के वयस्क हाे रहे दाेनाें शावक बुधवार रात 12 बजे वन विहार नेशनल पार्क पहुंचे। गुरुवार की सुबह इन्हें विशेष क्वारेंटाइन में प्राेटाेकाल के तहत रखा गया है। इसके बाद इन्हें खुले बाड़े में छाेड़ दिया जाएगा। वन विहार प्रबंधन ने अभी दाेनाें शावकाें का नामकरण नहीं किया है। डिप्टी डायरेक्टर एके जैन ने बताया कि कर्मचारियाें ने बंधन, बंधनात, बरूनी, बलसिंगम, बंधुला जैसे दाे दर्जन से अधिक नाम सुझाए हैं। पार्क की डायरेक्टर इनमें से नाम चुनेंगी। उसके बाद इनका नामकरण किया जाएगा।
मां ने छाेड़ा दिया था-बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर विंसेंट रहीम ने बताया कि नवंबर 2017 में दाेनाें शावक एक किले के पास लावारिश दिखे थे। नजर रखने पर पता चला कि इनकी मां छोड़कर दूसरे मेल के साथ मेटिंग के लिए जा चुकी है। शारीरिक रूप से शावक बहुत ही कमजाेर थे इसलिए मां ने उन्हें त्याग दिया था।
वीडियाे ने बटोरी थीं सुर्खियां
वर्ष 2019 में दोनों शावकों का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें इनका केयर टेकर दाेनाें काे अपने हाथों से सहलाकर प्रेम कर रहा था। वीडियो के सामने आने पर बाघों के रहन सहन में इंसानी दखल का कुछ वन्यजीव प्रेमियों ने विरोध भी दर्ज कराया। इसके बाद इन्हें इंसानी दखल से दूर रखा गया। तीन वर्ष के बाद भी ये जंगल के स्वछंद वातावरण लायक नहीं बन पाए। अपने खुद के दम पर सरवाइव नहीं करने की स्थिति में इन्हें भाेपाल भेजा गया।